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Thursday, August 6, 2015

aachran

                                   आचरण

आचरण  का सीधा संबंधआपके आचार ,विचार व् संस्कारों  से है  यदि आप ये सोचते  है की आपका आचरण शुद्ध है  तो मान लिजिये की आप आचार,विचार व् संस्कारो से परिपक्वव है , बात यही समाप्त नही हो जाती है,अब आप बेशक अपने आप को उस्ताद मान लो और अपने परिपक्वव् विचारो को मुफ्त में दुनिया भर में बाटने लगो जी हां जनाब यही तो आपका असली आचरण है क्या ये गलत बात नहीं की आप तो हाई स्कूल फेल और लगे phd की डिग्री बाँटने।
 कथन का तातपर्य यह है की, जब तक आप अपने अनुभव से किसी भी विषय में ठोस जानकारी प्राप्त नही कर लें  तब तक उस विषय में किसी अन्य को मुफ्त की सलाह न दे ,आपके इसी आचरण की वजह से कभी कोई किसी  मुसीबत में फंस सकता है या वह भी आपकी तरह किसी और को ये मुफ्त की सलाह देने का जुल्म कर बैठे  देखिए इस  तरह आप की वजह से २ लोग बेवजह की मुसीबत मोल ले बैठे ,
और जनाब आप घर में बैठे मजे में चाय की चुस्किया ले रहे, अपने को आचरण का धनी मान,

 आचरण आपको विनम्रता का पाठ व् इक अच्छा श्रोता होना भी सिखाता है अतः किसी को मुफ्त की सलाह देने से पहले एक अच्छे श्रोता की भाति सामने वाले की पूरी बात सुने, सुनने के बाद पूरे विचार से ही कोई सलाह दे 

Friday, July 31, 2015

आपके कथन

      क्या आपके जेहन मैं कभी कोई सवाल नहीं उठता ? 

                    मेरे जेहन मैं भी बहुत से सवाल उठते है, मैं सोचती हूँ की क्या होता होगा जब आत्मा इस शरीर को छोड़ देती है ?

                    क्या हम कोई दूसरी दुनिया मैं चले जाते है ? या फिर स्वर्ग अथवा नरक मैं ?
         लेकिन फिर मुझे लगता है की स्वर्ग और नरक तो सब यही है , तो फिर क्या होता है इस आत्मा का ?
१. क्या ये अणु परमाणु  मैं बट जाती है 
२. दूसरा शरीर ग्रहण कर लेती है 
३. अंतरिक्ष मैं विलीन हो जाती है 
४. तांका झाकी करती रहती  है 

अपने विचारो को शब्द दीजिये , नीचे दिए हुए पोल के द्वारा।।